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Monday, December 20, 2010

एक झूठा वकार है तो रहे

एक झूठा वकार है तो रहे
कोई ईमानदार है तो रहे

जितने होने थे हो चुके हमले
शहर अब होशियार है तो रहे

देख, दामन पे कितने धब्बे है
जिस्म अगर शानदार है तो रहे

हाल औरों का सोच ले, तुझ पर
सच अभी तक सवार है तो रहे

आपको इस घने कुहासे में
धूप का इन्तिज़ार है तो रहे

फूल पौधे झुलस गए कब के
अब चमन में बहार है तो रहे

कुछ कहो, दांत होते हैं बत्तीस
इक जुबां धारदार है तो रहे 




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